कवि और कविता : कवयित्री रेवा अग्रवाल

11
Reva Agrawal

धनुष का किया है खंडन कि‌ राम तेरा प्यारा है नाम रघुनंदन

धनुष का किया है खंडन कि‌ राम तेरा प्यारा है नाम रघुनंदन
माता कौशल्या के तुम लाड़ प्यार हो, भक्तों के आराध्य और लक्ष्मण के प्राणाधार हो, राजा दशरथ ने तुमसे लगाई है लगन।
धनुष का किया_ तुम ही से मैंने ये नाता बनाया, दुनिया को भूल मैंने तुमको अपनाया, तुम बन गये मेरे जीवन के प्राण धन । धनुष का किया
सारी दुनिया ‌मे बजता है तुम्हारा ही डंका, सागर को पार कर जलवाई थी लंका, रावण को मारा किया सभी ने अभिनंदन।
धनुष का किया
। राम तुम्हारा जीवन रेवा को बड़ा प्यारा, इसीलिए मनाते हैं हर वर्ष दशहरा, तुम्हारी प्यारी लीला का करते हैं मंचन। धनुष का किया है_ ।

राम तुम्हारी ये दुनिया हमको लगती प्यारी

राम तुम्हारी ये दुनिया हमको लगती प्यारी,रंग बिरंगे फूलो से जैसे सजी हुई क्यारी।
राम तुम्हारी ये__
सुंदर सलोना बचपन था न किसी बात की चिन्ता,मैया की लोरी होती झूला बाबा की बांहो का,सारे घर मे गूंजा करती हम बच्चो की किलकारी।
राम तुम्हारी ये। छोटी सी आशाओ भरा जीवन एक मेला था,न कोई चिन्ता होती थी न कोई दुख पास फटकता था,सारे जग की खुशियां मुट्ठी में थीं हमारी। राम तुम्हारी ये
रंग बिरंगे सपने होते,उसमें होतीं परियां, चंदा तारे भी हिलमिल के करते थे अठखेलियाँ, चंदा नहला देता था बिखेर चाँदनी न्यारी।
राम तुम्हारी ये फिर इक दिन ऐसा आया छूटी बाबुल की गलियां, गुड़िया मेरी छूट गई, बिसर गई सब सखियाँ, पी के घर आकर मुझ पर पड़ गई दुनियादारी। राम तुम्हारी ये।
राम तुम कहो तो सब कुछ छोड़ दूँ, तुम जो चाहो वो सब काम कर दूं, मेरा बचपन वापस कर दो ये है अर्जी हमारी।
राम तुम्हारी येतुम असंभव को भी संभव कर देते हो राम, फिर मेरी बातों पर क्यों नहीं देते ध्यान, मेरा बचपन लौटा दो,लौटा दो खुशियां सारी,जीवन भर रेवा करेगी चाकरी तुम्हारी राम तुम्हारी ये

हे दीनबंधु दीनानाथ कहाँ छुपे जाते

हे दीनबंधु दीनानाथ कहाँ छुपे जाते,मेरी करुण पुकार सुन ,तुम क्यों नही आते।
निर्बल हूं दिशाहीन हूं कोई नही अपना,दामन तुम्हारा थामा है बस तू मेरा है रामा,एक बार तो मेरी अवस्था पर तरस खाते।
मेरी करुण रोम रोम मेरा प्रभु, बस तेरा नाम पुकारे,मेरे ह्रदय का सिंहासन तुमको ही निहारे,राम आकर क्यों नहीं इस पर विराजते। मेरी करुण । राम तुमसे मेरा नाता बहुत पुराना है जबसे आखें खोली बस तुमको जाना है, मेरे भावों की अभिव्यक्ति में भी तुम ही सदा रहते। मेरी करुण ।
मेरी पूजा अर्चना में माना है बहुत कमियां, कभी कभी भ्रम में डाल देती है ये दुनिया ,रेवा के मन के भावों को क्या समझ नही पाते।
मेरी करुण

पत्थर पर लिखकर नाम हनुमत ने सागर पार किया

पत्थर पर लिखकर नाम हनुमत ने सागर पार किया
दिल पर लिख लिया नाम तो कष्टों से तार दिया।
पत्थर पर लिख। उल्टा जप कर वाल्मीकि ने रामायण लिख डाली, मानस लिख कर तुलसी ने अपना बना लिया, आकर स्वयं राम ने हस्ताक्षर कर दिया। पत्थर पर लिखकर ।
शबरी ने भक्ति करी ऐसी दीवानी हो गई,
चख चख मीठे बेरोॅ से डलिया भर गई,
हुई तपस्या पूरी जब राम ने नवधा भक्ति का ग्यान दिया।
पत्थर पर लिखकर । रेवा ने भी नाम जपकर जीवन जी लिया, रोम रोम और सांस सांस में तुझको बसा लिया कोई ठौर नहीं मेरा बस दिखता तेरा ठिया। पत्थर पर लिखकर

ऐसे हैं मारुति नंदन करते सब की भलाई

ऐसे हैं मारुति नंदन करते सब की भलाई
राम नाम पत्थर पर लिखकर सागर पर सेतु बनाई।
ऐसे हैं मारुति नंदन ।कौन सो काज कठिन जग माहि, जो तुम तात होत नहि पाहि, सुनत हो गये पर्वताकारा नाम लेकर रघुराई। ऐसे हैं मारुति नंदन ।
लंका जाय सिया सुधि लीन्ही राम जी की मुद्रिका दीन्ही,
अक्षय कुमार को मार गिराया,ब्रम्हास्त्र से खुद को बंधाया
जब पहुँचे रावण दरबारा ,जाकर वहां उसे ललकारा,
तब क्रोध में भरकर रावण ने पूछं में आग लगवाई।
ऐसे हैं मारुती नंदन _
उलट पलट लंका सब जारी,इत उत भागे सब नर नारी,सिया के आगे ठाड़ भयेहाथ जोड़ लीहीँ, तब चूड़ामणि सीता जी ने बालों से उतार कर दीहीँ,
रेवा धन्य हो गए परमवीर
अखियां भर भर आईं । ऐसे हैं मारुति_

राम तुम्हारा नाम कभी मैं भूल नहीं पाऊॅ

राम तुम्हारा नाम कभी मैं भूल नहीं पाऊॅ,
तुमको बिसरा कर फिर ठौर कहाँ पाऊॅ।
राम तुम्हारा नाम । हम सबके जीवन का तू प्राणाधार है,रामायण की चौपाई और गीता का सार है, इसको अपना धर्म बना कर नैय्या पार लगाऊँ। राम तुम्हारा नाम। तू सबका पालनहारा है देता सबको सहारा है जब जब विपदा आन पड़ी हमने तुमको पुकारा है, तेरे सहारे के सिवा हे राम न कुछ चाहूं। राम तुम्हारा नाम
हम नर हैं तू नारायण है,हम दीन दुखी तू रक्षक है,
ये सारी दुनिया मेरी खुशियों की भक्षक है,
जीवन रूपी गाड़ी तुम बिन कैसे आगे बढ़ाऊॅ।
राम तुम्हारा नाम ।
सिर पर रख दो हाथ जीवन रेवा का संवर जाए,
दिन रैन तुम्हारा नाम ही अपने जीवन में गाऊं
आदर्श भरा जीवन है तुम्हारा उसको अपनाऊं।
राम तुम्हारा नाम _

कितनी सलोनी सूरत है तेरी मेरे श्याम

कितनी सलोनी सूरत है तेरी मेरे श्याम,
तेरी बांकी चितवन ले ले न मेरे प्राण।
मेरे श्याम हो मेरे श्याम।
कितनी सलोनी_ उगते सूरज की लाली तेरे होंठो मे है बसी, उसमे तेरी मन्द मन्द मुस्कान है फंसी, तेरी इस मुस्कान पे हो जाऊँगी कुर्बान। हो मेरे श्याम हो मेरे श्याम, कितनी सलोनी । तेरे चंचल नयन ज्यों वन में दौड़ें हिरण, तेरे माथे की अलकें लगें भौंरे का गुंजन, तेरे चंचल नैनों में बसे हैं मेरे प्राण। मेरे श्याम हो मेरे श्याम ।
कितनी सलोनी सूरत
कमलों जैसे कर में लिऐ बांस की पोरी,
अपनी तानें सुना कर दिल कर लिया चोरी,
रेवा तो लुट गयी छवि देख के तेरी श्याम।
हो मेरे श्याम हो मेरे श्याम
कितनी सलोनी सूरत__

तेरे ही रंग में मै तो रंग गयी बांके सांवरिया

तेरे ही रंग में मै तो रंग गयी बांके सांवरिया,
ओढ़ ली मैंने कृष्णा तेरे नाम की चुनरिया।
तेरे रंग में । तेरे नयनों का कजरा चुरा के कारे मेघ हर्षाये, बिजुरी भी देख छटा तेरे पीताम्बर की चमक जाए, उमड़ घुमड़ कर कारे बदरा गा रहे कजरिया। तेरे रंग में । तेरे ख्यालों में हरदम डूबी रहती हूँ मेरे मन मोहन, किसी और काम में लगता नहीं ये मेरा तन मन, मुझको भी बना लो अपने गोकुल की गुजरिया। तेरे ही रंग ।
लाल पीला रंग मुझे नहीं भाए,भाए भी तो मुझको श्याम रंग भाए,
तेरे चंचल नयनों से रेवा का मन उलझ,उलझ जाए,
नज़र न लग जाए ऐसी है मन मोहनी सुरतिया।
तेरे ही रंग ।

श्याम कैसी बजाई तूने बाँसुरी

श्याम कैसी बजाई तूने बाँसुरी, कि बाँसुरी ने दिल ही ठग लिया।
श्याम कैसी_। जब जब ये बजती है सब को लूट लेती है, सारे काम रुकवा देती है,सुध बुध भुलवा देती है, इसकी तानों ने कैसा ये जादू कर दिया। कि बाँसुरी ने।
खाना नहीं पकता है पानी नही भरता है,
ध्यान नहीं लगता है मन खोया रहता है,
ये कैसी मस्तानी तान है कि दिल ही लुट गया।
कि बाँसुरी ने। बांस की पोरी है करे बरजोरी है,जब कान्हा अधरों पे धरे वो सब काम मन ही हरे, सोने की होती तो जाने क्या करती वो, ज़रा रेवा को बता डारे कैसे मोहनिया। कि बाँसुरी ने।

मेरी धड़कनों मे बसने वाले तुम हो मेरे राम

मेरी धड़कनों मे बसने वाले तुम हो मेरे राम,
मेरी सांसो के मनकें जपें सीताराम,
यदि तुम दामन छुड़ा लोगे मुझसे
मेरे सम्पूर्ण जीवन में लग जाएगा विराम।
मेरी धड़कनों में । तुम बिन मुझको पड़े कहीं न चैना दिन होवे या हो जाए काली रैना, राघव मेरे तन मन है तेरा ही बसेरा , अपनामेरी धड़कनों मे बसने वाले तुम हो मेरे राम, मेरी सांसो के मनकें जपें सीताराम, यदि तुम दामन छुड़ा लोगे मुझसे मेरे सम्पूर्ण जीवन में लग जाएगा विराम। मेरी धड़कनों में ।
तुम बिन मुझको पड़े कहीं न चैना
दिन होवेया हो जाए काली रैना,मेरी धड़कनों मे बसने वाले तुम हो मेरे राम,
मेरी सांसो के मनकें जपें सीताराम,
यदि तुम दामन छुड़ा लोगे मुझसे
मेरे सम्पूर्ण जीवन में लग जाएगा विराम।
मेरी धड़कनों में । तुम बिन मुझको पड़े कहीं न चैना दिन होवे या हो जाए काली रैना, राघव मेरे तन मन है तेरा ही बसेरा , अपना ये बसेरा कभी छोड़ना न राम मेरी धड़कन में ।
तुम ही हो भाई,बन्धु सखा हमारे ,
तुमसे ही बधें सारे नाते रिश्ते हमारे,
मुझको अपनी दासी बना लो न मेरे राम,
या बसा लो मुझको अपने अयोध्या धाम।
मेरी धड़कन में । तुमको जपे बिना दिन बीत जाए अधूरा तेरे सिवा जग में दूसरा कौन है मेरा, रहे जब तक इस दुनिया में मेरा बसेरा रेवा जपे हर दिन प्यारे बस तेरा ही नाम। मेरी धड़कन में ।
राघवमेरे तन मन है तेरा ही बसेरा ,
अपना ये बसेरा क
छोड़ना न राम
मेरी धड़कन में
। तुम ही हो भाई,बन्धु सखा हमारे , तुमसे ही बधें सारे नाते रिश्ते हमारे, मुझको अपनी दासी बना लो न मेरे राम, या बसा लो मुझको अपने अयोध्या धाम। मेरी धड़कन में ।
तुमको जपे बिना दिन बीत जाए अधूरा
तेरे सिवा जग में दूसरा कौन है मेरा,
रहे जब तक इस दुनिया में मेरा बसेरा
रेवा जपे हर दिन प्यारे बस तेरा ही नाम।
मेरी धड़कन में । ये बसेरा कभी छोड़ना न राम मेरी धड़कन में ।
तुम ही हो भाई,बन्धु सखा हमारे ,
तुमसे ही बधें सारे नाते रिश्ते हमारे,
मुझको अपनी दासी बना लो न मेरे राम,
या बसा लो मुझको अपने अयोध्या धाम।
मेरी धड़कन में _। तुमको जपे बिना दिन बीत जाए अधूरा तेरे सिवा जग में दूसरा कौन है मेरा, रहे जब तक इस दुनिया में मेरा बसेरा रेवा जपे हर दिन प्यारे बस तेरा ही नाम। मेरी धड़कन में ।

ओ निर्मोही तू क्या जाने तुझसे कितनी प्रीत लगाई

ओ निर्मोही तू क्या जाने तुझसे कितनी प्रीत लगाई,
साँस साँस तेरा नाम जपत है पर क्यों तूने दिया बिसराई।
मोह नहीं मुझको दुनिया से न तन से न मन से,
बस मैं चाहूं तू अपना ले मुझको सच्चे मन से,
तेरे लिए ही राघव मैंने अपनी सारी सुधि गवांई।
ओ निर्मोही तू क्रया । मेरे तन के तम्बूरे के तार एक एक करके टूट रहे, साँसों की माला के मनके भी धीरे धीरे बिखर रहे, कैसे समेटूं दिल के टुकड़ों को अब तू ही दे समझाई। ओ निर्मोही तू क्या ।
रेवा के मन की गलियाँ सूनी पड़ गईं हैं,
कोई बटोहीअब इधर आता ही नही है,
तूने ठानी न जाने कयों मुझसे ही निठुराई।
ओ निर्मोही तू क्या जाने__

ओंम नमः शिवाय बोलो ओम नमः शिवाय

ओंम नमः शिवाय बोलो ओम नमः शिवाय,
जब भी लागे जयकारा तब बोले ये जग सारा।
ओंम नमः शिवाय। सारे तन पे लगा के विभूति बाघम्बर लपेटे माथे पर धारे अर्ध चंद्रमा कण्ठ पे सर्प लपेटे, जब जब बाजे डमरू उनका सारा जग हर्षाए। ओंम नमः शिवाय बोलो।
खुद तोड़ें भंग धतूरा खुद पीसन बैंठें,
अपने आप ही घोंटें छाने फिर पूरा लोटा पीवें,
छोड़ छाड़ दुनिया के धंधे लोट पोट हो जायें।
ओंम नमः शिवाय बोलो
। गौरा जी सुन्दर सजीली कहते उनको भवानी, सरल वेष में भो‌ले बाबा वो हैं औघड़ दानी,गौरा का है रूप सलोना पर्वतों की‌रानी, रेवा उनका रुप देख सभी भक्त हर्षाए। ओम नमः शिवाय बोलो।

बड़ी दूर से आए हैं प्रभु जी तेरा दर्शन पाने को

बड़ी दूर से आए हैं प्रभु जी तेरा दर्शन पाने को,
खाली हाथ न लौटा देना,देख तो लो इक बार मेरे पांव के
छालों को ।
कष्टों से न घबराऊंगी यदि दे दोगे दर्शन मुझको,
पांव के छाले बिसराऊंगी यदि शरण में लेलो मुझको,
हे अन्तर्यामी तुम समझ तो लेना मेरे मन के भावों को।
खाली हाथ न लौटा देना। इस मायावी दुनिया से अच्छा है तेरा बसेरा, मेरे मन मन्दिर में डाल दो राम तुम अपना बसेरा, आंखें खुले रेवा की तो तेरे दर पे सवेरा हो खाली हाथ न लौटा देना।
आईं हूं तेरे दरबार में अपनी कुछ बातें ले कर,
फ़रियाद मेरी सुन लेना खड़ी हूं याचक बन कर,
तेरे द्वार पे आई हूं अपनी फरियाद सुनाने को।
खाली हाथ न लौटा देना_

पुकार रही तुमको तुम सुन तो रहे हो न

पुकार रही तुमको तुम सुन तो रहे हो न,
मेरी करुण पुकार को तुम समझ रहे हो न।
क्या प्यार तुम भी करते हो सच्चे मन से मुझसे,
क्या मेरी आराधना सुनते हो पूरे मन से
सुन लो हे राम मुझसे कभी भी न रूठना।
मेरी करुण पुकार । मैं हूँ इस दुनिया में छोटे तिनके के समान, उड़ा न ले जाए मुझको कहीं कोई भारी तूफान,मुझ पर अपनी दया सर्वदा बनाए रखना। मेरी करुण पुकार ।
दुनिया में तुम्हारे सिवा कोई और नही है मेरा,
मेरी सोई किस्मत जगा दो जग जाय भाग्य मेरा,
राघव तुम रेवा के मनोभाव पर कभी ध्यान तो दे देना।
मेरी करुण पुकार _

रे मनवा काहे को होत अधीर

रे मनवा काहे को होत अधीर,रे मनवा काहे को होत अधीर,
कभी न कभी तो सुनेंगे तेरी रघुवंशी रघुवीर।
लगन लगा ले अपने राम से चाहे राहें हों काटों से भरी
जपता चल तू राम नाम लग जायेगी फूलों की झड़ी,
सत्संग देने को मिल जायेंगे संत हो या फकीर।
रे मनवा काहे होत। दुनियादारी छोड़ के मनवा अपना ले अपने रघुवर को, दीनबंधु , दीनानाथ जानते हैं हर जन के मन को, उनका नाम जप ले रे मनवा बन जाएगी तेरी तकदीर। रे मनवा काहे होत।
सुंदर काया मिट्टी होगी जपले तू राघव का नाम,
जब भी विपदा आन पड़ी भागे भागे आए राम,
रेवा जपले अपने राम को जैसे जपते साधू फकीर।
रे मनवा काहे होत_

मेरे श्याम अब मेरा अपना कुछ भी न रह गया है

मेरे श्याम अब मेरा अपना कुछ भी न रह गया है,
जो कुछ भी था पास मेरे वो तेरा हो गया है।
मेरे श्याम अब मेरा। छोड़ दिया सब कुछ तेरे धाम आ बसी हूं, सुनने को बांसुरी तेरी तेरे दर पे आ पड़ी हूं, दिखा दे सलोना मुखड़ा मेरा मन तड़प रहा है। मेरे श्याम अब।
तेरे रंग में रंग चुकी हूं सब तुझको किया है अर्पण,
खुद को भी मैने कर दिया तेरे चरणों में समर्पण,
पास मेरे कान्हा अपना कुछ भी न रह गया है।
मेरे श्याम अब। तेरे रंग ढल के कान्हा कोई और रंग न भाए, चाहे तो इक बार तू मुझको आजमा के देख तो ले, रेवा को मिल गया तू ,सारा जगत ही मानो श्याम मेरा हो गया है। मेरे श्याम अब ।

मेरे नैना तोसे लागे,लागे तोसे साँवरे

मेरे नैना तोसे लागे,लागे तोसे साँवरे,
तेरे बिना मोसे अब जिया नही जाऐ रे।
तुम दीपक बनो मैं पतंगा बन कर जल मरूं,
तुम पर अपना तन मन न्योछावर सारा करूं,
तेरे बिना जीवन मेरा व्यर्थ लगे सांवरे।
मेरे नैना तोसे लागे। जन्मों की प्यासी मैं पपीहा बन गई सांवरे, तुम स्वाति घटा बन कर मेरी प्यास बुझाओ रे, मैं तो हरदम तेरी ही प्रतीक्षा करूं सांवरे। मेरे नैना तोसे लागे।
मैं होली की पिचकारी बन जाऊंगी सांवरे,
तुम र॔ग बन कर मुझमें समा जाओ सांवरे,
रेवा को तो तेरे र॔ग में र॔ग जाना है सांवरे।
मेरे नैना तोसे लागे__

आओ भक्तों कथा सुनाऐं भक्त और भगवान की

आओ भक्तों कथा सुनाऐं भक्त और भगवान की,
एक जटाधर, गंगाधर हैं दूजे हैं मेरे राम जी
आओ भक्तों कधा। राम कथा गौरा को सुना कर राघव का सम्मान किया, भुशुंडि जी ने गरूड़ की शंका का समाधान किया, तुलसीदास जी ने तो पूरी राम कथा लिख डाली जी। आओ भक्तों कथा ।

भोले बाबा जहां भी जाते राम राम जपते जाते
शंकर जी का दर्शन करके राम भी धन्य हो जाते,
इस अद्भुत भक्ति की महिमा बस ब्रह्मा जी ने जानी जी।
आओ भक्तों कथा। रेवा सागर पार किया राम ने फिर रूद्राभिषेक कराया , एक कमल के खो जाने पर राजीव नयन ने नयन चढ़ाया , तब भोले शंकर ने आकर राम का हाथ थाम लिया, बोले गौरा को शंका थी आप नर हो या नारायण जी। आओ भक्तों सुनाऐं ।

ज़मी से फ़लक तक ढूंढ लिया जग सारा

ज़मी से फलक तक ढूंढ लिया जग सारा,
मेरे गोविंद जैसा कोई और नहीं प्यारा।
ज़मी से फलक। वो माखन चुराता है,वो धेनू चराता है, अपनी ब॔सी की तानों से गोकुल को लुभाता है, वो अद्भुत है वो नटखट है जाने ब्रज सारा। ज़मी से फलक।
पनघट पर जाता है मटकिया फोड़ देता है,
ज़रा सी बात पर कलइया मरोड़ देता है
उनकी इन्ही अदाओं ने हमको है मारा।
ज़मी से फलक_। गोपी और राधा संग रास रचाने वाला, अर्जुन का सारथी बन गीता को सुनाने वाला, भक्तों के दुख दूर करे जाने ये जग सारा। ज़मी से फलक।
नटखट भी वो दयावन्त भी निभाता है मित्रता,
वर्ना दीन सुदामा के क्यों चरण पखारता,
इनके इसी सरल रूप पर रेवा ने दिल हारा।

आज हमारे घर आंगना गणपति जी आए हैं

आज हमारे घर आंगना गणपति जी आए हैं ,
उनके स्वागत में हमने चांद तारे सजाये हैं।
आज हमारे घर। हे नीलकण्ठ हे विशाल कर्ण मनमोहक रूप तुम्हारा है, मूषक पर आ जाओ हमने तुम्हे पुकारा है, तुम्हारी कृपा मिल जाए प्रभु हम पलकें बिछाएं हैं। आज हमारे घर । तुम तो दया के सागर हो भरते सबकी गागर हो, मंगलमूर्ति कामनापूर्ति करने वाले देव हमारे हो, तेरी कृपा पाने के लिए हम झोली फैलाए हैं। आज हमारे घर_
गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया,
रेवा सब मिल कर जोर से बोलो कामनापूर्ति मोरया,
तुमको भोग लगाने के लिए हम मोदक लाए हैं।
आज हमारे घर ।

जादू डाल के हमे तो कान्हा ठग गयो रे

जादू डाल के हमे तो कान्हा ठग गयो रे,
प्रेम जाल में अपने हमको तो जकड़ गयो रे।
जादू डाल के। जानते हैं मुरलीमनोहर प्रीत के हर रंग ढंग, इसीलिए तो करते रहते सब सखियों को तंग, मोहनी अपनी डाल सबके दिल में समाय गयो रे। जादू डाल के।
कान्हा लगते भोले भाले पर नटखट हैं इतने,
चोरी चोरी माखन खाकर मुख पे लपेटें अपने,
मैया को बताऐं कोइ मेरे मुख पर लगाय गयो रे।
जादू डाल के । श्याम के रंग में रंग गयी है ये दुनिया सारी, हम सब तो बन गये उनके प्यार के भिखारी, रेवा को अपनी प्रीत भीख में कान्हा दे गयो रे। जादू डाल के ।

मेरे रोम रोम में तुम्ही बसे हो मेरे राम

मेरे रोम रोम में तुम्ही बसे हो मेरे राम,
मेरी सांसों के धागे भी तुमसे बंधे मेरे, राम,
मेरी सांसों के धागे । मेरे नैना ये चाहें नित दर्शन तेरा करूं सुधा रस के प्याले भर भर मैं पियूं, सूरत नैनो में हरदम बसी रहे तेरी, आंखो में छवि तेरी बन्द कर लूं मैं राम। मेरी सांसों के धागे।
उपवन से चुन चुन के फूल मैं लाऊँ,
माला बना कर तुमको मैं पहनाऊं,
हाथ जोड़कर खड़ी रहूं तेरे आगे,
विनती करूं मिल जाये तेरा धाम।
मेरी सांसों के धागे। नंगे पांव चल कर तेरे मन्दिर है जाना, ठोकर न लग जाए हाथ मेरा थाम लेना, तेरे चरणों में रहे सदा मेरा ही ठिकाना, परिक्रमा मैं करती रहूं मैं तेरी आठों याम। मेरी सांसों के धागे।
टूटे फूटे शब्दों को गीतों में पिरोया
अपने ह्रदय के भावों से इसको सजाया,
कहता है जग सारा कि तुम हो अन्तर्यामी,
रेवा के भावों को तुम समझ लेना मेरे राम।
मेरी साँसों के धागे __

यदि मैं तुम्हें कभी याद न कर पाऊं तो ये मेरी मजबूरी है

यदि मैं तुम्हें कभी याद न कर पाऊं तो ये मेरी मजबूरी है
पर तुम भी मेरी सुधि न लो क्या ये बहुत जरुरी है

यदि_ मैं नारी हूं अनजाने में गलतियां कर बैठती हूं

न‌ चाहते हुए भी भूल कर बैठती हूं

पर तुम तो नारायण हो क्या तुम्हारा मानव बनना जरूरी है

यदि_
आ जाओ कभी अहिल्या की तरह तार दो मुझको
कभी शबरी की तरह अनूठा अपना प्यार दो मुझको
तुम्हें भूल न पाऊं ऐसी भक्ति का वरदान भी बहुत जरुरी है
यदि_

तुम मेरे इष्ट ‌हो मुझको बहुत अभीष्ट हो

इसी लिए मेरे दिल के बहुत समीप हो

रेवा गलती कर बैठे तो तुम भी भूल करो ऐसी क्या मजबूरी है

यदि__

हो रामाहो रामा
तुम्हरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी ना

हो रामाहो रामा
तुम्हरे आने से सज गई हमरी ये टूटी फूटी नाव
हो रामा_
पहले तुम्हारे पांव धुलवाएगे

फिर तुमको नैया में बैठाएगें

नाव हमारी नारी न बन जाए

क्योंकि ये परिवार चलाऐ

ऐसी किरपा करना प्रभु जी लगा रहे तेरा ध्यान
हो रामा_

गहरी नदिया नाव पुरानी दूर बहुत है किनारा

हाथ हमारे पतवार तो है पर प्रभु जी तेरा सहारा

अब तो तुम्हारे ही चरणों में है हम सब की ठांव
हो रामा_ रेवा ‘देने लगे प्रभु उतराई

केवट कहे नहीं रघुराई मेरी उतराई

तेरा दर्शन जब तुम लौट के आओगे गांव तुम्हरे आने से
हो रामा हो__

सम्मोहन न जाने कान्हा तुझमें ये कोन सा है

सम्मोहन न जाने कान्हा तुझमें ये कोन सा है
जब भी निहारूं मोहन मन तुझपे रीझता है!
सम्मोहन_

तेरी काली काली अलकें मुखड़े को चूमती हैं

भोंरों की पंक्ति मानों फूलों पे घूमतीं हैं

माथे पे लगा टीका दिल मेरा छीनता है

सम्मोहन_

तेरे कारे कजरारे नैना छाऐं है

घटा बन कर जैसे बरस ही जायेगें

भक्तों पे प्यार बन कर जो भी भीगता है

इसमेें जीवन उसका संवरता है
सम्मोहन_

इस तेरी बांकी चितवन पे गोकुल तो लुट रहा है

इस सांवरी सी सूरत ने मुझको भी तो ठगा है

अपनी अदा दिखा दिल रेवा का लूटता है

सम्मोहन_

देखो सावन आया तुम क्यों न आए कान्हा

देखो सावन आया तुम क्यों न आए कान्हा,

मेघा छा गये नभ में पक्षी गाएं गाना
देखो_

झूला डाला मोहन ,डाली रेशम की डोर,

झूलेंगे राधारमण ब्रज में मचेगा शोर, कान्हा तुम न आए तो बरसेंगे ये नैना। देखो
काले काले मेघों में श्याम की छवि दिखती,

सारी सखियां कान्हा तेरे दर्शन को तरसतीं,

एक बार तो आकर अपनी बांसुरी सुना जाना।
देखो_

हम पलकें बिछाए बैठी हैं राहों में तेरी,

सूनी पड़ी हैं अखियां बिना दर्शन के मेरी,

रेवा कहे आ भी जाओ मौसम है सुहाना
देखो__

चाहत मेरी ऐसी चाहत देखेगा जग ये सारा

चाहत मेरी ऐसी चाहत देखेगा जग ये सारा,

मैंने राम राम कहकर हरदम तुम्हें पुकारा।
चाहत_

मैंने अपने जीवन‌ का सर्वस्व तुमपे वारा,

तुमको पाने के लिए स्वामी जोगन का वेष धारा,

हाथों में लेकर इकतारा जपती हूं नाम तुम्हारा।

चाहत
तेरी चाकरी कर कर के मैं दिन अपने बिताऊंगी,

जब होगा अंधकार तो दीपक नैनो जलाऊंगी।

दिल की पुकार सुनकर देना हमें सहारा।
चाहत_

तेरे मुखारबिंदु को नैनों में मैं भर लूंगी,

जब प्राण तन से निकले कदमों में मैं रहूंगी ,

तेरा हाथ रेवा के सिर हो, चरणों सिर हमारा।

चाहत_

मैं तो कोरा कागज़ हूं

कोरा कागज़
__.
मैं तो कोरा कागज़ हूं , तुम इसमें प्रीत का रंग भरो।


सूरज को ग्रहण लगै या बदली में चांद छुपे पर अपनी प्रीति का रंग इतना गहरा हो

कि समय का चक्र इसे धूमिल न कर पाए,वरना मैं तो कोरा कागज़ हूं।
तुम इसमें ऐसा रंग भरो कि दुनिया में मेरी पहचान बन जाए,

तुम्हारी मेरी प्रीत का नाम अमर हो जाए, वरना मैं कोरा कागज़ हूं
या इस पर ऐसा गीत लिखो हर राही आए या ‌जाये ,

यही गीत दुहराता जाए, रेवा तुम्हारी मेरी प्रीत का नाम गीतों में अमर हो जाए,

वरना मैं तो कोरा कागज़ हूं

ढाई अक्षर प्रेम का

ढाई अक्षर प्रेम का अपने शाश्वत रुप में,

युगों-युगों से चला आ रहा है,

और युगों-युगों तक चलता जाएगा,

सूरज को ग्रहण लगे या चांद पर बादल छाऐ किंतु यह न बदल पाऐगा।
ढाई अक्षर_

यह गूढ़ है सरलता लिए, तो विस्तृत है निर्मलता लिए,

हिमालय सा ऊंचा है तो हिम सा उज्वल है,

रात्रि की कालिमा में भी चांदनी सा धवल है।

यह बहुरुपिया शब्द है जाने कब छल जाएगा

पर प्रीत निभाने वाले को एक नया अर्थ दे जाएगा।‌

ढाई अक्षर
इसमेें फूलों सी कोमलता है,

सुगंध है चंदन सी,कांटो जाल बिछा है और पत्थरों की चुभन भी,

क्या कब कौन किस राह पर जाएगा,विरह की आग में झुलसेगा या गीत मिलन के गाएगा।
ढाई अक्षर प्रेम किया ‌शबरी ने, सीता ने ,

अहिल्या ने राम से, प्रेम किया दुष्यंत और शकुन्तला ने,और रूक्मिणी ने श्याम से,

किन्तु कोई राधा या मीरा सा बन पाऐगा?

प्रिय मिलन की आशा लेकर रेवा, क्या जीवन ज्योति जलाएगा?

ढाई अक्षर

मन बन गया पुजारी

मन बन गया पुजारी
आंखें मैरी बन गई मंदिर इसमें है मूर्ति तुम्हारी,

प्रीति हमारी इतनी गहरी, मन बन गया पुजारी।
राग द्वेष और जाति , धर्म धर्म ऊंची प्रिति हमारी,

तुमको पाने की आशा में सुध बुध सभी बिहारी।
तुम कृष्ण नहीं,मै बनी न मीरा, फिर भी मिली प्रीत में पीड़ा,

इस पीड़ा को गले लगा कर पूरी उम्र गुजारी।
आंखें मैरी_

गर्व से जीने का अंदाज़

गर्व से जीने का अंदाज़
तुम वृक्ष हो, मैं लता हूं,

तुम अडिग हो मैं भंगुर हूं।
तुम थाम लो मुझको क्योंकि तुम्हारे बिना मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं,

तुम्हारी शाखा रूपी बाहें मुझे थाम लेंगी तो मैं बिखरने से बच जाउंगी,

और गर्व से जीने का अंदाज़ पाऊंगी।
वृक्ष और लता एक दूसरे के पूरक हैं,उनका जीवन भर का साथ है,

रेवा, जैसे हर दिन के साथ जुड़ी होती रात है
तुम_

प्रभु कैसे पूजूं तुमको मन के मनके बिखर गये

प्रभु कैसे पूजूं तुमको मन के मनके बिखर गये,

पूजा का थाल सजाया था हार फूल सब बिखर गए।
प्रभु कैसे_ हर सांस में है सुमिरन तेरा,

मन फिर भी मेरा भटक रहा मेरा,

कैसे ध्याऊं तुझको मन माया में अटक रहा,

मुझको नींद नहीं आती, सपने मेरे बिखर गये। पूजा का_
मन के घने अंधियारे में ‌तुम ज्योति बन आओ,

मन का अवसाद मिटा दो प्रभु जीवन धन बन आओ,

बिना तुम्हारे राम दिल के टुकड़े बिखर गए।
पूजा का _

रेवा के इष्ट तुम्हीं हो, तुम ही हो जीवन धन,

तुम्हारी ही यादों में डूबा रहता ये तन मन,

तुम्हारी इस चाहत में दुनिया के रिश्ते बिखर गए।

पूजा का

काहे को आए ऊधो हमरी डगरिया

काहे को आए ऊधो हमरी डगरिया,

हमको न भाए तुम्हरी ज्ञान भरी बत्तियां।
हमतो है ऊधौ कान्हा के प्रेम की दीवानी,

हमको न भाए तुम्हरी ज्ञान की कहानी,

श्याम के बिना हम तो हो गई है बावरिया।
काहे को आए_

माखन हमारा अब कौन चुराएगा,

नाम हमारा लेके कौन बुलाएगा,

सावन भादौ बन गयी हैं हमरी ये अंखियां।

काहे को_

पनघट पर गोरी कोई जाती नहीं है,

कदंब की डाली फूल खिलते नहीं है,

सूनी पड़ी है सारे गोकुल की गलियां।

काहे को
श्याम से कहना हम भी रुठ जाएंगे,

कितना भी मनाएं श्याम हम नहीं मानेंगे रेवा,

कहे आना ही पड़ेगा कान्हा हमारी डगरिया।
काहे को_

अन्तर्मन में बसने वाले मेरे प्रिय हे राम

अन्तर्मन में बसने वाले मेरे प्रिय हे राम,

फिर मैं क्यों खोजने जाऊं तुमको तीरथ धाम।
अन्तर्मन_

मेरे ह्रदय में रहते हो, तुम नयनों में समाये हो मैं,

जब भी दर्शन पाऊं तुम्हारा मन को मिले विश्राम।

अन्तर्मन
रूप तुम्हारा इतना मनोहर, महिमा कहीं न जाए,

अपने सामने देख तुम्हें चंदा भी शर्माए,

हरदम तुम्हें निहारा करूं दिन हो चाहे शाम।

अन्तर्मन
हे राजीव नयन पीताम्बर धारी महिमा तुम्हारी सबसे न्यारी,

कितनो को तुमने तार दिया नर हो या हो नारी,

निशि , दिन गीत तुम्हारे गाऊं और मुझे क्या काम।
अन्तर्मन_
कलियुग की बारी आई फिर से ले लो अवतार,

रावण की तरह सारे दुष्टों का कर दो तुम संहार,

रेवा मांग रही तुम्हें अंतिम ये वरदान।
अन्तर्मन_

कान्हा तुझपे मरने का दिल ‌करता है

कान्हा तुझपे मरने का दिल ‌करता है,

तुझपे मर मिटने का दिल करता है
रे कान्हा__
तेरे सिर पर मोर मुकुट सुन्दर,

रतनारे अधरों पर बंसी बजे मधुर मधुर,

प्यारी बंसी को सुनते रहने का कान्हा तुझपे मरने का दिल ‌करता है,

तुझपे मर मिटने का दिल करता है

रे कान्हा_

यमुना आए तुम्हारे चरण पखारने,

उस पर पीला पटका लगे बिजुरी सा चमकने,

इस चकाचौंध में खो जाने का मन करता है।

रे कान्हा
तन तो वृन्दावन की गलियों में भटके,

तेरी अदा पर मन बार-बार अटके तुमपे अपना सर्वस्व लुटाने का मन करता है।
रे कान्हा_

कान्हा काहे को इतना मोहता है मुझको,

काहे को अपनी प्रेम डोर से बांधता है मुझको,

इस बन्धन में बंधने को रेवा का मन करता है।

रे कान्हा_

जहंं जहंं पांव पड़े रघुवर के बन गये तीरथ धाम

जहंं जहंं पांव पड़े रघुवर के बन गये तीरथ धाम,

छू कर धूलि राम चरणों को बन जाए मलय समान।
जहं_

मेरे शब्दों में सामर्थ कहां,

मैं तेरी महिमा गाऊं,

ले लो अपनी शरण में मुझको शायद मैं कुछ बन जाऊं,

मैं अकिंचन, अज्ञानी हूं कहां से पाऊं ज्ञान।

जहंं
‍मेरे कर्मो का लेखा,जोखा कोई समझ न पाया,

तेरे भजन बिना जो दिन बीता वापस कभी नहीं आया,

प्रभु मुझ पर अपनी कृपा करो मैं हूं बहुत नादान।
जहं_

मेरे भावों का सम्मान ये दुनिया चाहे न करें न करें,

रेवा ने कुछ‌‌ गीत लिखे कुछ शब्द लिखे भावों से भरे,

मैंने जो कुछ लिखा बस उसमें लिखा तेरा नाम।

जहं ….

मैंने रोज़ पुकारा तुमको तुम ना आए सांवरे

मैंने रोज पुकारा तुमको तुम ना आए सांवरे

मैने बारंबार पुकारा तुम ना आए सांवरे

चुन चुन फूलों का हार बना सांसों की डोर से उसे सजाया

पर फूल सूख कर बिखर गए तुम ना आए सांवरे

मैने बारंबार पुकारा तुम ना आए सांवरे

तेरे पीताम्बर में गोटा लगाकर हीरे मोती से उसे सजाया

सारे नगीने बिखर गए तुम ना आए सांवरे

मैने बारंबार पुकारा तुम ना आए सांवरे

रच रच के छप्पन भोग बनाए अपने हाथों से खिलाने को

 मेरे हाथ उठे ही रह गए तुम ना आए सांवरे

मैने बारंबार पुकारा तुम ना आए सांवरे

अपने गीतों को तुम्हें सुनाने शब्दों से सजाया था

मेरे सारे शब्द बिखर गए तुम ना आए सांवरे

मैने बारंबार पुकारा तुम ना आए सांवरे

रेवा ने नैन दीपक जलाए तेरी आरती उतारन को

जल जल कर बुझ गए नैन दीप, तुम ना आए सांवरे

मैने बारंबार पुकारा तुम ना आए सांवरे

सुनो न मेरे रघुवर

सुनो न मेरे रघुवर कि ये नज़ारे कुछ भी नहीं है आगे तुम्हारे

इसके सिवा आगे कुछ भी नहीं है

मेरे दिल पे रहता है पहरा तुम्हारा , पहरा तुम्हारा

सुनो

नीले गगन जैसी सूरत प्यारी प्यारी चंदा और तारे करें चाकरी तुम्हारी

इतना मनोरम दृश्य कहीं भी नहीं है

मेरे दिल पे लिख गया है बस नाम तुम्हारा, बस नाम तुम्हारा

सागर की लहरों पर  छाई छवि है तुम्हारी लहरें भी लहरा के उतारें आरती तुम्हारी

रेवा, ऐसा मनभावन नजा़रा अभी तक न देखा

मेरा दिल तो जपता रहता बस नाम तुम्हारा, बस नाम तुम्हारा

सुनो

राम यदि तुम कृपा निधान पुकारे नहीं जाते

राम यदि तुम कृपा निधान पुकारे नहीं जाते
तो हम तुम्हारी अदालत में आज नहीं आते
राम_


हमने लिखी है अर्जी अपने गुनाहों की
सुनवाई तुमको करनी है हमारे कर्मों की
क्या होगा तुम्हारा फैसला यदि हम जान पाते
तो हम तुम्हारी ….


तुम बन्दी बना लो या कर दो हमें बरी
दोनों ही हालात में मंजूर है रजा तेरी
जीत हो या हार तुम्हारे चरणों में ही आते
तो हम …..


दुनिया की अदालत का फैसला सच झूठ से चलता
पर तुम्हारे पास तो भक्तों का मेला लगता
रेवा को मंजूर हर वो फैसला जो भी‌ तुम करते
तो हम …..

राम तुम सरयू की धारा तुम्हारी मैं नाव बनूंगी

राम तुम सरयू की धारा तुम्हारी मैं नाव बनूंगी
जहां ले चलोगे , जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगी
राम तुम_

नदी विच भंवर है, लहरें हैं ऊंची नीची
मैं अकेली नैया चलूं कैसे सीधी
तुम बनो पतवार ,रामा तुम बनो पतवार

ऐजी तुम बनो पतवार तो पार मैं लगूंगी
राम_


टूटी फूटी नैया हूं कब तक चलूंगी
लगा किनारे तेरा नाम मैं जपूगी
परछाईं बन करके रामा परछाईं बन करके

ऐजी बनकर के तेरी सेवा मैं करूंगी
राम_

डूबते हुए को तुमने दिया किनारा

इसीलिए गजराज ने तुमको पुकारा

दीन की पुकार सुनो रामा दीन की पुकार सुनो

ऐजी रेवा की पुकार सुनो चरण पकड़ लूंगी

राम_

भटक रही हूं डगर डगर

भटक रही हूं डगर डगर ,भटक रही हूं गली गली
कोई मुझको बता दें प्यारे कहां मिलेंगे राम
भटक_

उनका पता दे जो कोई बन जाऊं उनकी दासी

वो कोई गैर नहीं है वो है राम अविनाशी

सारी सेवा टहल करूंगी धूप हो या छांव भटक_


मीरा जी मुझको भी दिलवादो इकतारा
सूरदास जी अपने भजनों का रस भर दो सारा
नरसी मेहता की तरह मैं भी नाचूंगी गली गली
भटक__


नित तेरा श्रंगार करुंगी और तुझे निहारूंगी
पर पर तुझको सिमरुंगी,नैनो में छवि भर लूंगी
रेवा सब कुछ छोड़ के भक्ति करूंगी निष्काम भटक__

कवयित्री रेवा अग्रवाल

11 thoughts on “कवि और कविता : कवयित्री रेवा अग्रवाल

  1. कवियित्री रेवा अग्रवाल लिखित कविताऔं को पढ़ने से बहुत अच्छा आनन्द की अनुभूति हुई। कवियित्री रेवा अग्रवाल को इन उत्कृष्ट कविताऔं के लिए बहुत बहुत बधाई हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *