काव्य / गीत – ग़ज़ल

चले जा रहे होगे तुम – कवयित्री सुमित्रा कुमारी सिन्हा

चले जा रहे होगे तुम चले जा रहे होगे तुम, ओ दूर देश के वासी। चली रात भी, चले मेघ भी, चलने के अभ्यासी। भरा असाढ़,घटाएँ काली नभ में लटकी होंगी; चले जा रहे होगे तुम कुछ स्मृतियाँ अटकी होंगी। छोड़ उसाँस बैठ गाड़ी में दूर निहारा होगा, जबकि किसी अनजान दिशा ने तुम्हें पुकारा होगा, हहराती गाड़ी के डिब्बे में बिजली के नीचे,…

जिस दिन भी बिछड़ गया प्यारे – कवि भारत भूषण अग्रवाल

जिस दिन भी बिछड़ गया प्यारे  जिस दिन भी बिछड़ गया प्यारे ढूँढते फिरोगे लाखों में फिर कौन सामने बैठेगा बंगाली भावुकता पहने दूरों दूरों से लाएगा केशों को गंधों के गहने ये देह अजंता शैली सी किसके गीतों में सँवरेगी किसकी रातें महकाएँगी जीने के मोड़ों की छुअनें फिर चाँद उछालेगा पानी किसकी समुंदरी आँखों में दो दिन में ही बोझिल होगा मन का लोहा तन का सोना…